Transformer in Hindi – ट्रांसफार्मर कैसे बनाया जाता है

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Transformer in Hindi जब से इंसानों ने विद्युत का इस्तेमाल शुरू किया है तब से हम ने विभिन्न प्रकार के उपकरणों और यंत्रों का आविष्कार किया जिससे हमारा काम और सरलता से पूर्ण हो सके। ट्रांसफार्मर भी वैसे ही एक है जिसका इस्तमाल हम विद्युत को एक स्थान से दूसरे स्थान में भेजने का कार्य करते है। आज के इस लेख में हम आपको Transformer in Hindi के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं। 

ट्रांसफार्मर एक ऐसा यंत्र है जिसका इस्तमाल हम विद्युत को एक सर्किट से दूसरे सर्किट में भेजने के लिए करते है और इस प्रक्रिया में ट्रांसफार्मर फ्रीक्वेंसी और पावर को बदलने नही देता है। यह कैसे और क्यों होता है यह सब आप Transformer in Hindi के इस लेख में जानेंगे। 

ट्रांसफार्मर क्या है 

ट्रांसफार्मर एक विद्युत यंत्र है जिसका इस्तमाल हम सर्किट में फ्रीक्वेंसी और पावर को बिना घटाए वोल्टेज को बढ़ाने और घटाने के लिए करते है। आपको बता दें की ट्रांसफार्मर के इस्तमाल से ही हम आज बिचली को इतनी आसानी से सभी घरों में पहुंचा पा रहें हैं। 

सरल भाषा में ट्रांसफार्मर एक बिजली से चलने वाला यंत्र है जिसका इस्तेमाल एक सर्किट से दूसरे सर्किट में वोल्टेज की मात्रा को बढ़ाने या घटाने के लिए किया जाता है किसी सर्किट में ट्रांसफार्मर की मदद से हम वोल्टेज को बढ़ाते है तो फ्रीक्वेंसी और पावर पर कोई फर्क नहीं पड़ता। अर्थात यह एक खास किस्म का यंत्र है जो बिना फ्रीक्वेंसी और पावर के साथ कोई छेड़छाड़ की है वोल्टेज को बढ़ाने और घटाने का कार्य करता हैं। 

ट्रांसफार्मर में दो वाइंडिंग होते है पहले वाइंडिंग में जब बिजली आती है तो उसे मैग्नेटिक एनर्जी में बदल दिया जाता है और दूसरे वाइंडिंग में भेज दिया जाता है दूसरे वाइंडिंग में मैग्नेटिक एनर्जी को दोबारा इलेक्ट्रिक एनर्जी में बदल दिया जाता है इस प्रक्रिया में वोल्टेज स्टेप अप और स्टेप डाउन होता है मगर करंट की मात्रा, फ्रीक्वेंसी और पावर में कोई फर्क नहीं आता जिससे हम करंट को एक स्थान से दूसरे स्थान पर बिना वोल्टेज बदले भेज पाते हैं। 

ट्रांसफार्मर का खोज किसने किया

ट्रांसफार्मर का खोज विलियम स्टेनले ने 1885 में अमेरिका के एक लब में किया मगर ये माना जाता है की ट्रांसफार्मर का खोज ब्रिटेन के मशहूर वैज्ञानिक माइकल फैराडे ने 1813 में कर दिया था। 

जिस वजह से बहुत से जगह पर ट्रांसफार्मर के खोजने का श्रेय माइकल फराडे को दिया जाता है वहीं दूसरी तरफ बहुत सारे जगहों पर ट्रांसफार्मर को खोजने का श्रेय विलियम स्टेनले को दिया जाता है। मगर असल में माइकल फराडे ने सर्वप्रथम ट्रांसफार्मर का खोज किया इस बात को पूरी तरह से साबित नहीं किया जा सका जिस वजह से ट्रांसफार्मर को खोजने का मुख्य श्रेय अमेरिका के मशहूर वैज्ञानिक विलियम स्टेनले को दिया जाता है जिन्होंने 1885 में ट्रांसफार्मर को खोजा। 

ट्रांसफार्मर किस सिद्धांत पर काम करता है

ट्रांसफार्मर माइकल फराडे के द्वारा दिए गए फराडे लॉ ऑफ इंडक्शन के सिद्धांत पर काम करता है। भले ही फराडे को ट्रांसफार्मर को खोजने का श्रेय नहीं मिला मगर ट्रांसफार्मर के काम करने का सिद्धांत फराडे के बताए हुए नियम पर ही काम करता हैं। 

फराडे ने जो सिद्धांत बताया था उसके आधार पर वोल्टेज हमेशा मैग्नेटिक फील्ड में होने वाली कंपन पर निर्भर करता है दूसरी भाषा में voltage is directly proportional to magnetic flux यह सिद्धांत है फराडे के लॉ ऑफ इंडक्शन का जिसके आधार पर ट्रांसफार्मर काम करता हैं। 

इस सिद्धांत को समझने के लिए आप एक छोटा सा कार्य कर सकते है जिसमें एक कॉपर के तार को गोल-गोल मोड़कर बैटरी से जोड़ दें और उसके बाद एक चुंबक ले और तार के बीच में हिलाएं आप देखेंगे कि इस तार में अपने आप करंट आ गया है। 

यही बात माइकल फराडे ने अपने सिद्धांत में समझाने का प्रयास किया था जिसमें उन्होंने बताया था कि चुंबक में मैग्नेटिक फील्ड होता है जिस में परिवर्तन करने पर बिजली उत्पन्न होती है इसी सिद्धांत का इस्तेमाल करके ट्रांसफार्मर में दो वाइंड बनाए जाते है और बिजली को एक स्थान से दूसरे स्थान बिना वोल्टेज बदले भेजने के लिए इस नियम का पालन किया जाता है। 

ट्रांसफार्मर कैसे बनता है

ट्रांसफार्मर को बनाने के लिए तीन मुख्य पार्ट्स होते हैं, जिनका इस्तमाल किया जाता है।

Primary Winding 

Magnetic Core

Secondary Winding

  • Primary Winding

अगर आपको ट्रांसफार्मर में बिजली उत्पन करना है तो primary winding काम आती है। यही वो तार होता है जो किसी बजली के सोर्स से जुड़ा होता है और बिजली पैदा करने का काम करता हैं।

  • Magnetic core

जैसा की हमने आपको ट्रांसफार्मर के सिद्धांत में बताया था कि बिजली पैदा करने के लिए मैग्नेटिक फ्लक्स में छेड़छाड़ होना आवश्यक है मैग्नेटिक फ्लक्स बनाने के लिए ही इस मैग्नेटिक कोर का इस्तेमाल किया जाता है। यह एक closed मैग्नेटिस circuit क्रिएट करता हैं। 

  • Secondary Winding

ट्रांसफार्मर में जो बिजली बनी है उसको आगे बढ़ने के लिए इस विंडिंग का इस्तेमाल किया जाता है। Primary Winding और मैग्नेटिक कोर के मदद से ट्रांसफार्मर में बिजली उत्पन्न होती है जिससे उपयोगिता अनुसार आगे बढ़ाने के लिए सेकेंडरी वाइंडिंग का यूज किया जाता हैं। 

इस प्रकार इन तीनों पार्ट्स को सही से जोड़ने पर ट्रांसफार्मर काम करता है और मैग्नेटिक फ्लक्स के जरिए विद्युत बनाता है जिस विद्युत को आगे भेजा जाता है ट्रांसफार्मर में जो विद्युत उत्पन्न होता है उससे आगे भेजने में फ्रीक्वेंसी या पावर में कोई भी बदलाव नहीं आता हम किसी सर्किट में ट्रांसफार्मर को जोड़ देते हैं ताकि उस सर्किट के वोल्टेज में जरूरत अनुसार वोल्टेज का परिवर्तन हो मगर करंट की मात्रा, फ्रीक्वेंसी और पावर में किसी भी प्रकार का परिवर्तन न हो। 

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ट्रांसफार्मर के प्रकार 

ट्रांसफार्मर के अंरचना और कार्य को समझने के बाद अब आपको ट्रांसफार्मर के प्रकार के बारे में समझना होगा। आज के समय में ट्रांसफार्मर दो प्रकार के होते है – 

  1. Step Up Transformer
  2. Step Down Transformer
  • Step Up Transformer

ऐसे ट्रांसफार्मर जो प्राइमरी और सेकेंडरी वाइंडिंग की मदद से वोल्टेज को सर्किट में बढ़ाने का कार्य करते है। अर्थात वह ट्रांसफार्मर जिसे सर्किट में जोड़ने पर वोल्टेज बढ़ता है उसे हम स्टेप अप ट्रांसफॉर्मर कहते हैं। 

  • Step Down Transformer

यह भी ट्रांसफार्मर का एक खास प्रकार होता है जिसमें प्राइमरी और सेकेंडरी वाइंडिंग की मदद से वोल्टेज को सर्किट में घटाने का कार्य किया जाता है। अर्थात वह ट्रांसफार्मर जिसे सर्किट में जोड़ने पर वोल्टेज घटता है उसे हम स्टेप डाउन ट्रांसफार्मर कहते हैं। 

उम्मीद करते हैं ट्रांसफार्मर के प्रकार और उसके कार्य करने की प्रणाली को अब विस्तार पूर्वक समझ गए होंगे। 

Frequently Asked Questions (FAQ)

Q. ट्रांसफार्मर क्या है?

Ans. ट्रांसफार्मर एक विद्युत यंत्र है जिसका इस्तेमाल करके हम सर्किट में वोल्टेज को घटाने या बढ़ाने का कार्य करते है वह भी सर्किट में बिना फ्रीक्वेंसी और पावर को बदलें।

Q. ट्रांसफार्मर का आविष्कार किसने किया?

Ans. ट्रांसफार्मर का आविष्कार विलियम स्टेनले ने 1885 में किया।

Q. ट्रांसफार्मर कितने प्रकार के होते हैं?

Ans. ट्रांसफार्मर दो प्रकार के होते हैं – स्टेप अप ट्रांसफॉर्मर और स्टेप डाउन ट्रांसफार्मर।

Q. स्टेप अप ट्रांसफॉर्मर क्या करता है?

Ans. स्टेप अप ट्रांसफॉर्मर किसी सर्किट में वोल्टेज को बढ़ाने का कार्य करता है।

Q. ट्रांसफार्मर का इस्तमाल क्यों करते हैं?

Ans. ट्रांसफार्मर का आविष्कार हम किसी सर्किट में फ्रीक्वेंसी और पावर में बिना कोई बदलाव की है वोल्टेज को घटाने या बढ़ाने के लिए करते हैं।

निष्कर्ष

आज की हमने अपने इस लेख में आप सभी लोगों को Transformer in Hindi के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी प्रदान की हुई है। हमें उम्मीद है कि हमारे द्वारा दी गई आज की जानकारी आपके लिए काफी ज्यादा हेल्पफुल और यूज़फुल रही होगी। अगर आपके मन में हमारे आज के इस लेख से संबंधित कोई भी सवाल या फिर कोई भी सुझाव है।

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मैं उत्तर प्रदेश वाराणसी डिस्ट्रिक्ट का रहने वाला हूं और मैं एक दिव्यांग हूं। मुझे अलग-अलग विषयों पर आर्टिकल लिखना बहुत अच्छा लगता है और इसी को मैंने अपना जुनून बनाया है। मैं पिछले 3 वर्षों से आर्टिकल लेखन का कार्य कर रहा हूं। आपको हमारे द्वारा लिखे गए लेख कैसे लगते हैं?, आप हमें कमेंट बॉक्स में अवश्य बताएं। धन्यवाद Gmail ID - [email protected]

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