ओटीपी क्या होता है – ओटीपी के फायदे और नुकसान

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Otp Kya Hota Hai शायद इसके बारे में लोग जानते होंगे परंतु अभी भी कई सारे ऐसे लोग मौजूद हैं जिन्हें ओटीपी के बारे में पता ही नहीं होता है। ओटीपी के जरिए सभी प्रकार के ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और ऑनलाइन डॉक्यूमेंट वेरीफिकेशन को पूरा किया जाता है। जैसा कि हम सभी लोग जानते हैं कि अब ज्यादातर सभी प्रकार के काम ऑनलाइन किए जाते हैं और जब ऑनलाइन काम किए जाते हैं तो ऐसे में हमें सिक्योरिटी की भी जरूरत होती है। 

और हमारे सभी प्रकार के ऑनलाइन लेनदेन और अन्य प्रकार के ऑनलाइन कामों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए ओटीपी का इस्तेमाल किया जाता है। ऑनलाइन कि सभी प्रकार के कार्यों में एक्स्ट्रा सिक्योरिटी के रूप में ओटीपी का इस्तेमाल किया जाता है। आज हम आपको अपने इस लेख में ओटीपी क्या होता है? और ओटीपी के फायदे एवं नुकसान? क्या-क्या हो सकते हैं इसके बारे में विस्तार पूर्वक से जानकारी प्रदान करने वाले हैं। 

ओटीपी क्या होता है

जिस प्रकार से हम अपने सभी प्रकार के अकाउंट को सुरक्षित रखने के लिए पासवर्ड बनाते हैं और एटीएम से पैसे निकालने के लिए पिन क्रिएट करते हैं और सभी प्रकार के अन्य ट्रांजैक्शन को सिक्योर करने के लिए यूपीआई पिन का इस्तेमाल करते हैं ठीक उसी प्रकार से ओटीपी भी एक प्रकार से पासवर्ड की तरह ही कार्य करता है। 

परंतु यह सिर्फ एक समय के लिए ही मान्य होता है। किसी भी प्रकार के ओटीपी वेरीफिकेशन से पहले हमें अपना मेन पासवर्ड और यूजर नेम एंटर करना होता है और उसके बाद हमें अपने यूजर आईडी या फिर कहे अपने आप को वेरीफाई करने के लिए ओटीपी का सत्यापन करना होता है।

ओटीपी कभी 4 अंकों का, 6 अंकों का और 8 अंकों का भी हो सकता है। जब एक बार आप कहीं पर प्राप्त ओटीपी को वेरीफाई कर लेते हैं तब वह ओटीपी अपने आप निष्क्रिय हो जाता है और दोबारा से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। इसके जरिए हमें सभी प्रकार के लेनदेन और इंटरनेट पर एक्स्ट्रा सिक्योरिटी मिलती है। 

हम जितने भी इंटरनेट पर सिक्योरिटी का इस्तेमाल करते हैं उसके अलावा एक्स्ट्रा सिक्योरिटी के रूप में जब हम चल फिर वेरिफिकेशन के लिए एक यूनिक कोड का इस्तेमाल करते हैं जो एक सीमित समय के लिए मान्य होता है इसे हम ओटीपी कहते हैं। ओटीपी आपके मोबाइल नंबर से लेकर आपकी जीमेल आईडी पर प्राप्त किया जा सकता है।

ओटीपी का फुल फॉर्म क्या है

जिस प्रकार से सभी चीजों का अपना फुल फॉर्म होता है ठीक उसी प्रकार से ओटीपी का भी अपना एक फुल फॉर्म है। ओटीपी का फुल फॉर्म ‘वन टाइम पासवर्ड’ होता है। ओटीपी का  हिंदी में मतलब एक सीमित समय में इस्तेमाल किए जाने वाला पासवर्ड होता है। 

ओटीपी कैसे काम करता है

ओटीपी समानता हमारे यूजर आईडी या फिर हमें वेरीफाई करने का काम करता है। चलिए अब हम इसे थोड़ा विस्तार से समझने का प्रयास करते हैं। उदाहरण के रूप में आप किसी भी सोशल मीडिया पर अपना अकाउंट बनाते हैं और उचित सुरक्षा प्रदान करने के लिए आप अच्छा पासवर्ड और यूजर आईडी भी बनाते हैं जो कि काफी यूनिक होता है। 

अब ऐसे में कई सारे हैकर ऐसे भी होते हैं जो पता नहीं कैसे और किस तकनीक का इस्तेमाल करके आपके यूजर नेम और यूजर पासवर्ड के बारे में पता कर लेते हैं और आसानी से आपका अकाउंट एक्सेस करके उसका गलत उपयोग करने लगते हैं। अब ऐसे में ऐसा क्या किया जाए जिससे कोई हैकर हमारा यूजरनेम या पासवर्ड जान भी जाए तब पर भी वह हमारे किसी भी प्रकार के अकाउंट को एक्सेस ना कर सके।

इंटरनेट हैकर से ही नहीं बल्कि अगर कोई हमारा यूजर नेम और पासवर्ड जान भी जाए तो भी वह ऐसी परिस्थिति में हमारे अकाउंट को एक्सेस ना कर पाए। इस समस्या के सलूशन को निकालने के लिए और इंटरनेट पर एक्स्ट्रा सिक्योरिटी को ऐड करने के लिए ओटीपी का निर्माण किया गया। ओटीपी जिसे एक्स्ट्रा टू वेरिफिकेशन के नाम से भी जाना जाता है इसके जरिए सभी प्रकार के इंटरनेट के अकाउंट और लेन-देन को एक्स्ट्रा सिक्योरिटी प्रदान की जाती है।

अगर आपने एक्स्ट्रा वेरिफिकेशन यानी कि ओटीपी का फीचर ऑन कर रखा है तो ऐसे में कोई यूजर या फिर है कराकर किसी भी प्रकार के अकाउंट को हैक करने की कोशिश करेगा और ऐसे में अगर वह आपके यूजर नेम और पासवर्ड को जान भी जाएगा तो भी वह आपके अकाउंट को एक्सेस नहीं कर पाएगा और उसका उद्देश्य धरा का धरा रह जाएगा। 

ओटीपी के जरिए एक कोड हमारे मोबाइल नंबर पर या फिर हमारे जीमेल आईडी पर भेजा जाता है जो पूरे तरीके से इंटरनेट पर इंक्रिप्टेड होता है और इस कोड को हमें किसी भी प्रकार के अकाउंट को एक्सेप्ट करने के लिए यूजरनेम और पासवर्ड वेरिफिकेशन के बाद दर्ज करना होता है। 

जब हम ओटीपी वेरीफिकेशन पूरा कर लेते हैं तब हम आसानी से अपने किसी भी प्रकार के अकाउंट को एक्सेस कर पाते हैं और अब तो यूजर नेम और पासवर्ड चेंज करने के लिए भी ओटीपी वेरिफिकेशन का इस्तेमाल किया जाता है ताकि कोई भी हमारे यूजर नेम और पासवर्ड को चेंज ना कर पाए।

OTP का इस्तेमाल कहाँ कहाँ किया जाता है

इंटरनेट बैंकिंग से लेकर सभी प्रकार के इंटरनेट पर बने अकाउंट और इंटरनेट पर किए जाने वाले कामों को एक्स्ट्रा सिक्योरिटी प्रदान करने के लिए ओटीपी का इस्तेमाल किया जाता है। आजकल सभी प्रकार के ऑनलाइन यूपीआई ट्रांजैक्शन से लेकर बैंक ट्रांजैक्शन से जुड़ी हुई सारे फीचर को एक्स्ट्रा सिक्योरिटी प्रदान करने के लिए ओटीपी यूज़ करना कंपलसरी कर दिया गया है। 

बिना ओटीपी वेरिफिकेशन के आप अपना कोई भी डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन भी नहीं कर सकते और ना ही किसी भी प्रकार के अकाउंट को एक्सेस कर पाएंगे। अब ई-कॉमर्स वेबसाइट पर भी यूजर की सुरक्षा को देखते हुए यूजरनेम और पासवर्ड के साथ-साथ ओटीपी वेरीफिकेशन लॉगइन की सुविधा प्रदान की जा रही है। ताकि किसी भी यूजर के साथ कोई भी इंटरनेट के माध्यम से फ्रॉड ना हो सके।

ओटीपी कहां कहां पर प्राप्त किया जा सकता है

अब कई सारे लोगों के मन में सवाल उठ रहा होगा कि आखिर ओटीपी वेरिफिकेशन के लिए हम ओटीपी को कहां कहां पर और कैसे प्राप्त कर सकते हैं। हम आपके जानकारी के लिए आपको बता दें कि ओटीपी को आप अपने मोबाइल नंबर, जीमेल आईडी और ओटीपी कॉल वेरिफिकेशन के जरिए प्राप्त कर सकते हैं। 

आप गूगल अकाउंट को भी सिक्योर करने के लिए गूगल ने ओटीपी वेरीफिकेशन को अनिवार्य किया हुआ है। मतलब कि अगर आप गूगल के किसी भी प्रकार के प्रोडक्ट को यूज करना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको यूजर नेम और पासवर्ड के साथ ओटीपी वेरिफिकेशन करना भी जरूरी है।

ओटीपी का फीचर्स कैसे चालू करें

अगर आप अपने इंटरनेट पर मौजूद सभी प्रकार के अकाउंट को एक्स्ट्रा सिक्योरिटी प्रदान करने के लिए उसमें ओटीपी का फीचर्स ऑन करना चाहते हैं और चाहते हैं कि अकाउंट को एक्सेस करने के लिए आपको यूजर नेम और पासवर्ड दर्ज करने के साथ-साथ ओटीपी वेरिफिकेशन से होकर गुजर ना पड़े ताकि आपका अकाउंट पूरे तरीके से सिक्योर रहे तो इसके लिए आपको ओटीपी के फीचर्स को आज चालू करना होगा और इस फीचर को आसानी से आप कुछ आसान स्टेप को फॉलो करके ऑन कर सकते हैं जिसकी जानकारी नीचे बताई गई है। 

STEP 1. अब जिस भी प्रकार का इंटरनेट से जुड़ा हुआ अकाउंट यूज कर रहा है वहां पर आपको प्रोफाइल के फीचर के साथ-साथ एक ‘सिक्योरिटी’ का भी फीचर प्रदान किया गया होगा और आपको इस पर क्लिक करना होगा।

STEP 2. अब यहां पर आपको पासवर्ड बदलने और नया यूजर नेम क्रिएट करने के साथ-साथ ऑन ओटीपी’  नामक एक ऑप्शन दिखाई देगा और आपको इस ऑप्शन पर क्लिक कर देना होगा।

STEP 3. अब यहां पर आपको ओटीपी वेरिफिकेशन का कोर्ट कहां पर प्राप्त करना चाहते हैं इसका विकल्प दिखाई देगा और आपको यहां पर मोबाइल नंबर एसएमएस के द्वारा, जीमेल आईडी पर और  ओटीपी कॉल वेरिफिकेशन का ऑप्शन मिलेगा और आप इनमें से कोई भी अपनी सुविधानुसार ऑप्शन का चुनाव कर सकते हैं।

STEP 4. अब इसके बाद इस फीचर को ऑन करने के लिए इसका कंफर्मेशन दे दी थी और इस प्रकार से आपका टू स्टेप वेरिफिकेशन यानी कि ओटीपी वेरिफिकेशन का फीचर ऑन हो जाता है।

ध्यान दें

इंटरनेट बैंकिंग और आने इंटरनेट बैंकिंग की फैसिलिटी को यूज करने से पहले अपने नजदीकी बैंक शाखा में जाकर ओटीपी वेरिफिकेशन के लिए अपना मोबाइल नंबर वेरीफाइड करवाएं और इस फीचर को वहां पर जाकर ऑन करवाएं और अगर आपका मोबाइल नंबर वेरीफाइड है तो आप खुद अपने इंटरनेट बैंकिंग के प्रोफाइल के ऑप्शन पर जाकर वहां टू स्टेप वेरीफिकेशन या ओटीपी वेरिफिकेशन का फीचर ऑन कर सकते हैं।

पासवर्ड और ओटीपी में अंतर

इन लोगों को पासवर्ड को हिंदी में क्या कहते हैं? इसके बारे में पता होगा उनको पासवर्ड और ओटीपी में अंतर भी समझ में आता होगा। पासवर्ड और ओटीपी बिल्कुल एक दूसरे से अलग है और इनका इस्तेमाल भी एक दूसरे के विपरीत रूप में किया जाता है। मगर कई सारे लोग ओटीपी को ही पासवर्ड समझते हैं और पासवर्ड को ओटीपी समझ लेते हैं। 

जिसका यह सही तो इस्तेमाल नहीं कर पाते। अगर आपको इन दोनों के बीच का अंतर समझ में आएगा तब आप इन दोनों के अंतर को समझ कर इसका सही इस्तेमाल कर पाएंगे। चलिए अब आगे हम आपको पासवर्ड और ओटीपी में क्या अंतर है? इसके बारे में बताते हैं। जिसकी जानकारी नीचे विस्तार से बताई गई है।

  • किसी भी प्रकार के इंटरनेट से जुड़े हुए अकाउंट को बनाने से पहले हमें अपना यूजरनेम के बाद पासवर्ड कितना होता है। इसमें ओटीपी का कोई काम नहीं होता है।
  • पासवर्ड को चेंज करने के लिए और अकाउंट को एक्सेस करने के लिए ओटीपी का इस्तेमाल किया जाता है।
  • पासवर्ड को हम चेंज कर सकते हैं परंतु ओटीपी को चेंज नहीं किया जा सकता है। ओटीपी को एक सीमित समय के लिए ही इस्तेमाल किया जाता है।
  • अगर कोई हमारा पासवर्ड और यूजर नेम जान जाता है तब वह आसानी से हमारे किसी भी प्रकार के इंटरनेट से जुड़े अकाउंट को एक्सेस कर सकता है परंतु बिना ओटीपी के वह व्यक्ति ऐसा बिल्कुल भी नहीं कर सकता।
  • पासवर्ड को हम अपने हिसाब से क्रिएट कर सकते हैं परंतु ओटीपी आटोमेटिक क्रिएट होता है और इसमें हम अपना कोई भी हाथ नहीं लगा सकते हैं।
  •  पासवर्ड एक बार जो हम बनाते हैं वह जब तक हम बदलेंगे नहीं वही रहेगा और ओटीपी हर बार अपने आप बदल बदल कर आता है।
  •  हम बिना ओटीपी के किसी अकाउंट को एक्सेप्ट नहीं कर सकते और बिना पासवर्ड के ओटीपी को प्राप्त नहीं कर सकते हैं। 

ओटीपी यूज करने के फायदे

जहां हम ऑनलाइन सभी प्रकार के कामों को सिक्योरिटी प्रदान करने के लिए पासवर्ड का इस्तेमाल करते हैं ठीक उसी प्रकार से हम ओटीपी को इस्तेमाल करके अपने इंटरनेट के सभी प्रकार के कामों और अकाउंट को एक्स्ट्रा सिक्योरिटी प्रदान कर सकते हैं। कुछ इसी प्रकार के कई सारे और भी ओटीपी यूज करने के फायदे हैं जो कि नीचे निम्नलिखित रुप में बताए गए हैं।

  • यूजर नेम और पासवर्ड चोरी हो जाने के बाद भी यह हमारे अकाउंट को पूरी तरीके से सिक्योरिटी प्रदान करने में सक्षम है।
  • ओटीपी वेरीफिकेशन के जरिए वास्तविक यूजर का सत्यापन किया जाता है और तब जाकर कहीं हम अकाउंट को  एक्सेस कर पाते हैं।
  • आजकल बड़ी ही आसानी से पहले के मुकाबले सोशल अकाउंट हैकर के द्वारा हैक कर लिए जाते हैं परंतु अगर आपने ओटीपी वेरीफिकेशन का फीचर ऑन किया हुआ है तब आप जब भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट को यूज करने के लिए  एक्सेस करेंगे तब आपको हर बार ओटीपी वेरीफिकेशन पर होकर गुजरना होगा। और इससे आपको एक्स्ट्रा सिक्योरिटी हैकर से प्राप्त होती है।
  • ओटीपी के बेहतरीन इंटरनेट सिक्योरिटी के एक्स्ट्रा फीचर को ऑन करने पर आपको कोई भी अतिरिक्त चार्ज देना नहीं होता है और यह पूरे तरीके से निशुल्क होता है।
  • ओटीपी हमेशा अपने आप एक बार यूज करने के बाद एक्सपायर हो जाता है और फिर उसका कोई भी उपयोग दोबारा नहीं कर सकता जिससे हमें एस्ट्रा सिक्योरिटी मिल जाती है।
  • सभी प्रकार के ऑनलाइन ट्रांजैक्शन को वेरीफाई करने से पहले ओटीपी वेरीफिकेशन से होकर गुजरना होता है और ऐसे हम अपने पैसों और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन को सुरक्षित रख सकते हैं।

ओटीपी यूज करने के नुकसान

अब आप सोच रहे होंगे कि जब वो ओटीपी यूज करने के इतने ज्यादा फायदे होते हैं तो आखिर इसके नुकसान क्या हो सकते हैं तो मेरे प्यारे दोस्तों इसके कुछ अपने नुकसान भी होते हैं जो कि नीचे निम्नलिखित रुप में बताए गए हैं।

  • आजकल हैकर मोबाइल नंबर पर प्राप्त होने वाले एसएमएस को जाम कर देते हैं और किसी टेक्नोलॉजी के जरिए ओटीपी अपने नंबर पर प्राप्त कर लेते हैं।
  • अगर आपको ईमेल वेरीफिकेशन के जरिए ओटीपी को प्राप्त करते हैं तब ऐसे में यह थोड़ा कम सिक्योर हो सकता है।
  • अगर आपका किन्ही कारणों से ट्रांजैक्शन फेल हो जाता है या कैंसिल हो जाता है तब आपको हर बार नया ओटीपी प्राप्त करना होगा क्योंकि यह अपने आप ही वन टाइम यूज़ करने के बाद एक्सपायर हो जाता है।
  • कई बार जब किसी भी थर्ड पार्टी बैंक के जरिए ओटीपी वेरीफिकेशन का कोड भेजा जाता है तब वह पूरी तरीके से सिक्योर नहीं हो सकता है।
  • अगर आपने गलती से अपना मोबाइल या फिर मोबाइल नंबर किसी को थोड़े समय के लिए यूज करने के लिए दे दिया तो वह ओटीपी प्राप्त करके आपके पूरे बैंक अकाउंट को खाली कर सकता है और इतना ही नहीं आपके सभी प्रकार के इंटरनेट पर मौजूद डाटा को भी गलत तरीके से इस्तेमाल कर सकता है।

FAQ About Otp Kya Hota Hai

Q: वन टाइम पासवर्ड का क्या मतलब है?

ANS वन टाइम पासवर्ड का मतलब ओटीपी होता है।

Q: ओटीपी को कितनी बार इस्तेमाल किया जा सकता है?

ANS ओटीपी को केवल एक बार इस्तेमाल किया जा सकता है और फिर यह अपने आप ही निष्क्रिय हो जाता है।

Q: ओटीपी कितने समय बाद एक्सपायर हो जाता है?

ANS ओटीपी अपने आप 30 मिनट बाद एक्सपायर हो जाता है। कई कई ओटीपी की वैलिडिटी केवल 10 मिनट तक की भी होती है।

Q: ओटीपी कितने अंकों का हो सकता है?

ANS ओटीपी 4 से लेकर 8 अंकों के बीच के किसी भी अंक में हो सकता है।

Q: क्या ओटीपी का इस्तेमाल सभी इंटरनेट यूजर को करना चाहिए?

ANS जी हां बिल्कुल आज के समय में सभी इंटरनेट यूजर को टीवी के फीचर का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए ताकि आप इंटरनेट पर एक्स्ट्रा सिक्योरिटी को हमेशा इनेबल करके रखते हैं।

Q: ओटीपी का दूसरा नाम क्या है?

ANS ओटीपी का दूसरा नाम टू स्टेप वेरीफिकेशन है।

निष्कर्ष

आज के इस लेख में हमने आप सभी लोगों को Otp Kya Hota Hai और ओटीपी के फायदे और नुकसान? क्या हो सकते हैं इसके बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की हुई है। हमने आप सभी लोगों को ओटीपी के बारे में लगभग सभी प्रकार की विस्तृत जानकारी प्रदान कर दी है और हमें उम्मीद है कि आपको ओटीपी के ऊपर आधारित यह लेख काफी ज्यादा हेल्पफुल और यूज़फुल लगा होगा।

इस लेख से संबंधित अगर आपके मन में कोई भी सवाल या फिर सुझाव है तो आप हमें कमेंट बॉक्स में बना सकते हैं और आप आपके द्वारा दिए गए प्रतिक्रिया का जवाब शीघ्र से शीघ्र देने का प्रयास करेंगे। इसके अतिरिक्त हम चाहते हैं कि आप अपने दोस्तों के साथ और अपने सभी सोशल मीडिया चैनल पर इस लेख को शेयर करना ना भूले ताकि इस जानकारी के बारे में अन्य लोगों को आपके माध्यम से पता चल सके। इस लेख को शुरू से अंत तक पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद और आपका शुभ हो।

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मैं उत्तर प्रदेश वाराणसी डिस्ट्रिक्ट का रहने वाला हूं और मैं एक दिव्यांग हूं। मुझे अलग-अलग विषयों पर आर्टिकल लिखना बहुत अच्छा लगता है और इसी को मैंने अपना जुनून बनाया है। मैं पिछले 3 वर्षों से आर्टिकल लेखन का कार्य कर रहा हूं। आपको हमारे द्वारा लिखे गए लेख कैसे लगते हैं?, आप हमें कमेंट बॉक्स में अवश्य बताएं। धन्यवाद Gmail ID - [email protected]

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