Bijali kise kahate Hain – बिजली किसे कहते है

इंसान आज बहुत हद तक विकास कर चुका है और इंसानी विकास में सबसे बड़ा योगदान बिजली का है। बिजली की खोज से इंसान का जीवन काफी सरल और सुगम हो गया तो क्या कभी बिजली को देखकर आपके मन में यह प्रश्न उठता है कि Bijali kise kahate Hain आखिर वह तरल है या ठोस किस प्रकार की चीज होती होगी या बिजली जिसका इस्तेमाल हम अपने रोजमर्रा के जीवन में करते हैं और अपने जीवन को आसान बना पाते हैं। 

आखिर Bijali kise kahate Hain और इसके इस्तेमाल से किस प्रकार हमारे जीवन सरल हो पाया इस संबंध में विस्तार पूर्वक जानकारी आज के लेख में हम विस्तर पूर्वक जानकारी देने का प्रयास कर रहे हैं। 

Bijali kise kahate Hain

इलेक्ट्रॉन के बहाव को बिजली कहते हैं। जब इलेक्ट्रॉन नेगेटिव से पॉजिटिव की बहता है तो हमें इसे विद्युत धारा कहते हैं। बिजली को बिना एना वैज्ञानिक शब्दों का इस्तेमाल किए अगर परिभाषित करना हो तो हम कहेंगे की घर्षण ताप और रासायनिक क्रियाओं से जगताप और प्रकाश एक साथ पैदा होता है तो उस रूप को बिजली कहते हैं। 

बिजली को इलेक्ट्रॉन से जोड़कर देखा जाता है हमारे आसपास जितने भी धातु मौजूद है उन सब में इलेक्ट्रॉन और प्रोटोन होता है। इलेक्ट्रॉन किसी भी धातु की सबसे छोटी इकाई होती है जो हर धातु के अंदर मौजूद होती है जब हम घर्षण टॉप या किसी रासायनिक क्रिया के जरिए उस इलेक्ट्रॉन को धातु के बाहर निकालते है और वह चलना शुरु करती है तो इस बहाओ को बिजली कहा जाता है। 

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बिजली की खोज कैसे हुई

लगभग हर बच्चे ने बचपन में अपने किताब में पढ़ा होगा कि आग की खोज कैसे हुई मगर शायद ही ऐसा कोई होगा जो बिजली की खोज के बारे में जानता हो। आपको बता दें कि बिजली का खोज इंसानी सभ्यता ने बहुत बाद किया। 

पुराने राजा महाराजाओं के जमाने में बिजली जैसी कोई चीज नहीं होती थी सर्वप्रथम इस चीज के बारे में अमेरिका के एक वैज्ञानिक बेंजामिन फ्रैंकलिन को 1600 सदी में पता चला। उस वक्त Benjamin Franklin आसमान में दिखने वाले बिजली पर गहन अध्ययन कर रहे थे और उनके मन में एक अजीब सी जिज्ञासा ने जन्म लिया जिसके परिणाम स्वरुप उन्होंने अपने आप को लोहे के तार से बांध लिया और इस लोहे के एक छोर पर पतंग बांधकर उड़ाने लगे और एक छोर पर पीतल की चाबी बांधकर जमीन में गाड़ दिया। 

वह उस पतंग को भीषण आंधी में उड़ा रहे थे जहां तेज बिजलियां कड़क रही थी लोगों को उनकी जान का खतरा दिख रहा था मगर बेंजामिन फ्रैंकलिन ने इस बात को साबित किया कि जब बिजली उस पतंग से टकराई तो इनके शरीर से होते हुए धरती में समा गई क्योंकि इनके शरीर को किसी धातु ने जमीन के साथ छू रखा था इस विचार ने अर्थिंग (earthing) सिद्धांत का खोज किया और बिजली गिरने से बहुत सारे घर बर्बाद हो जाते थे मगर उनके इस सिद्धांत ने बहुत सारे घर को बचाया। 

यह वह पहला प्रयोग था जिसने व्यक्ति को बिजली के करीब लाकर खड़ा किया उसके बाद धरती पर अनेक विद्वानों ने जन्म लिया जो बिजली पर गहन अध्ययन करके उसके कार्यप्रणाली को समझने का प्रयास किया। 

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बिजली का अनोखा इतिहास

बिजली के इस प्रयोग ने दुनिया भर के लोगों को चौंका कर रख दिया हर किसी के मन में बिजली को समझने की जिज्ञासा जन्म लेने लगी। उस समय डाल्टन जैसे महान वैज्ञानिक थे जिन्होंने दुनिया को यह बताया कि जब हम किसी धातु को तब तक तोड़े जब तक वह इतना छोटा ना हो जाए कि उसका अब टुकड़ा करना संभव ना हो तो वह धातु एटम का रूप ले लेता है और उस atom के अंदर देखने पर हमें इलेक्ट्रॉन और प्रोटोन जैसी चीजें दिखाई देती है। 

इस संदर्भ में और अधिक आविष्कार करने के बाद कैथोड राय ट्यूब नाम का एक यंत्र सबके समक्ष आया जहां से वैज्ञानिक ने सर्वप्रथम धातु और इलेक्ट्रॉन को अलग करके दिखाया और यही वह पहली स्थिति थी जब इंसान को बिजली के बारे में पता चला। 

कैसे बनने लगा बिजली

ऊपर बताया तरीका काफी महंगा था इस वजह से किसी को भी बिजली बनाने की प्रक्रिया को सरल और सस्ता करना था। किसी महान वैज्ञानिक ने जनरेटर के बारे में बताया और एक ऐसा यंत्र इंसानों के सामने लाकर रख दिया जिस यंत्र को तीज घूम रहे पंखे से जोड़ दिया जाए तो वह यंत्र बिजली बनाने लगता है। 

कहने का तात्पर्य है एक जनरेटर जिसे चलाकर बिजली उत्पन्न की जा सकती है लेकिन उस जनरेटर की पंखी को चलाने के लिए टरबाइन को घुमाना बहुत आवश्यक था टरबाइन भी एक कि सिम का बहुत बड़ा पंखा होता है जिसे विभिन्न तरीकों से घुमाने का प्रयास किया जाता है ताकि आसानी से बिजली बनाया जा सके। 

आज के जमाने में एटॉमिक पावर स्टेशन है जहां पर तेज गर्मी पैदा करके टरबाइन को घुमाया जाता है और उस टरबाइन से एक छोटा सा जनरेटर फिक्स किया जाता है जो उस टरबाइन के घूमने पर घूमने लगता है और हमें बिजली की सुविधा देता है। इसके अलावा हमारे पास विंडमिल है जो तेज हवाओं से टरबाइन को घुमाता है और जनरेटर को चलने में मदद करता है। 

इन सभी तरीकों का इस्तेमाल करके आज हम उचित मात्रा में बिजली बना पा रहे हैं। 

Frequently Asked Questions (FAQ)

Q. बिजली किसे कहते हैं?

इलेक्ट्रॉन के प्रवाह को बिजली कहते है या हम यह भी कह सकते है कि घरसान, ताप, और रासायनिक अभिक्रिया से पैदा होने वाले चमक ऊर्जा को बिजली कहते है।

Q. बिजली कैसे बनता है?

जब किसी भी प्राकृतिक संसाधन से टर्बिन को इस तरह घूमते है की वो बिजली पैदा करने के लिए जेनेटर को चलाए तो इसे बिजली कहते है। 

Q. हमारे घर में कितनी बिजली होती है?

एक घर में आमतौर पर 240 वोल्ट की बिजली पास की जाती है जिसकी फ्रीक्वेंसी 50Hz होती है

निष्कर्ष

अमित करते हैं ऊपर बताए गए सभी बातों को ध्यान पूर्वक पढ़ने के बाद आप Bijali kise kahate Hain इस बात को अच्छे से समझ गए होंगे और अगर इस संबंध में आपको विस्तार पूर्वक जानकारी मिली है तो इसे अपने मित्रों के साथ साझा करें साथ ही अपने किसी भी प्रकार के प्रश्न पूछना ना भूले। 

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